_शैलेंद्र साहित्य सरोवर के बैनर तले हुई काव्य गोष्ठी
– _कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं सुना कर किया मंत्रमुग्ध__
फतेहपुर (वी.टी)। मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 430 वीं साप्ताहिक सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन के पी सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ। काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए के पी सिंह कछवाह ने वाणी वंदना मे भाव प्रसून प्रस्तुत करते हुए पढ़ा कि सरास्वती मां आइए, होकर हंस सवार। वाणी पुत्रों पर करो, करुणा की बौछार। कार्यक्रम को गति देते हुए पढ़ा कि जो कुछ करना आज कर ,तू कल पर मत टाल। ना जाने कब शीश पर आ मड़़राये काल। डा. सत्य नारायण मिश्र ने पढ़ा कि मोदी जैसा नेता मिलता , युगों युगों पश्चात। नदी- नाव संयोग बना है, बहुत दिनों के बाद। अनिल कुमार मिश्र ने पढ़ा कि जब तक समझे उसकी माया, जीवन क्षणभंगुर रूठ गया।निस्पंद हुआ तन मन चंचल, रिश्तों से नाता टूट गया। पंकज कुमार त्रिपाठी ने पढ़ा कि पहले तो यह तन ही दुर्लभ ,जो शिक्षक बनकर मिलता है । है पुनीत यह कर्म बहुत,जीवन इससे ही खिलता है। प्रदीप कुमार गौड़ ने पढ़ा कि काम, क्रोध ,मद ,लोभ ,मोह सब,मन में बसते शत्रु तमाम। जीवन पथ पर भटक न जाऊं, मेरा हाथ पकड़ लो राम। डॉ.शिव सागर साहू ने पढ़ा कि शुद्ध वायु जल चाहिए,जीवन के आधार। पर्यावरण सुधारिये, तब होवे निस्तार। राम अवतार गुप्ता ने पढ़ा कि मात- पिता इस धरा में ,बहुत बड़ी सौगात। मात- पिता की कृपा से, प्रथम पूज्य बन जात। उमाकांत मिश्र ने पढ़ा कि हैं कितने रंग दिखे हमको, यारो, बदरंग जमाने में।असमर्थ दिखी जब यह पीढ़ी,मां- बाप का बोझ उठाने में। आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने पढ़ा कि इस छोटे से जीवन में ही, कुछ ऐसा कर जाओ, जिससे याद करे यह दुनिया, अक्षय कीर्ति कमाओ। कार्यक्रम के अंत में पुजारी जी ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया।
