लोकतंत्र या पारिवारिक विरासत? शास्त्री परिवार की नई पीढ़ी भी चुनावी मैदान में उतरने को तैयार!!

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👉 लोकतंत्र या पारिवारिक विरासत? शास्त्री परिवार की नई पीढ़ी भी चुनावी मैदान में उतरने को तैयार!!

फतेहपुर। राजनीति में परिवारों की विरासत पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रही है। फतेहपुर जनपद में भी एक बार फिर ऐसा ही राजनीतिक समीकरण बनता दिखाई दे रहा है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के परिवार की नई पीढ़ी अब जिले की राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ाती नजर आ रही है। सामाजिक कार्यों के माध्यम से लोगों के बीच पहुंच बना रहे विराज शास्त्री को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि उनका पहला बड़ा राजनीतिक मैदान फतेहपुर ही हो सकता है।
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की लोकप्रियता और उनके परिवार के राजनीतिक प्रभाव के चलते वर्ष 1980 में उनके पुत्र हरिकृष्ण शास्त्री ने कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में फतेहपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। फतेहपुर की जनता ने उन्हें अपना समर्थन दिया और वह संसद पहुंचे। वर्ष 1984 में भी उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल कर लोकसभा की दहलीज पार की। हालांकि वर्ष 1989 में उन्हें तत्कालीन राष्ट्रीय राजनीति के बड़े चेहरे विश्वनाथ प्रताप सिंह के सामने हार का सामना करना पड़ा।
हरिकृष्ण शास्त्री के कार्यकाल को जिले में औद्योगिक और कृषि विकास से जोड़कर देखा जाता है। उनके बाद राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास उनके पुत्र विभाकर शास्त्री ने किया। वर्ष 2007 में उन्होंने फतेहपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन जनता का समर्थन हासिल नहीं कर सके। इसके बाद कांग्रेस ने वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भी उन पर भरोसा जताया, किंतु इस बार भी सफलता उनसे दूर रही।
अब एक बार फिर शास्त्री परिवार की तीसरी पीढ़ी फतेहपुर की राजनीति में सक्रिय दिखाई दे रही है। लाल बहादुर शास्त्री के परनाती, हरिकृष्ण शास्त्री के नाती और विभाकर शास्त्री के पुत्र विराज शास्त्री लगातार सामाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी से जुड़ने के बाद वह ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल व्यवस्था, स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, भंडारे और अन्य जनसेवा कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों के बीच अपनी पहचान बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में विराज शास्त्री किसी विधानसभा सीट से दावेदारी पेश कर सकते हैं। हालांकि भाजपा उन्हें टिकट देगी या भविष्य के लिए इंतजार कराएगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस फतेहपुर ने हरिकृष्ण शास्त्री के बाद शास्त्री परिवार को दोबारा राजनीतिक सफलता नहीं दिलाई, क्या वही जनपद अब विराज शास्त्री को अपना समर्थन देगा? इसका जवाब फिलहाल भविष्य के गर्भ में है, लेकिन उनकी बढ़ती सामाजिक सक्रियता ने जिले की राजनीति में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।

✍️ नागेंद्र सिंह अध्यक्ष फतेहपुर प्रेस क्लब

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