2017 जैसा माहौल नहीं, 2022 में दो सीटों का नुकसान और अब 2027 से पहले संगठन में बढ़ती निराशा बनी चिंता का विषय!

सवाल तो पूछेंगे❓

👉2027 की राह में भाजपा की चुनौती: क्या हताश कार्यकर्ता पार लगाएगा चुनावी नैया!!

फतेहपुर (वंदना टाईम्स)। “बड़ी कठिन है डगर पनघट की” पुरानी फिल्म का यह गीत आज जिले की सियासत पर भी कहीं न कहीं सटीक बैठता दिखाई देता है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी की राह आसान नहीं दिख रही है। मौजूदा राजनीतिक माहौल और संगठन की स्थिति इस ओर संकेत कर रही है कि यदि समय रहते हालात नहीं बदले तो पार्टी को चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में जबरदस्त जनसमर्थन की लहर थी। उसी माहौल का परिणाम रहा कि जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। लेकिन 2022 के चुनाव तक परिस्थितियां बदल चुकी थीं। 2017 जैसा माहौल नहीं बनने के कारण पार्टी को छह में से दो सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।
अब 2027 के चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। हालांकि 25 जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम के बाद भाजपा के पक्ष में कुछ सकारात्मक माहौल अवश्य बना, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह माहौल चुनाव तक बरकरार रह पाएगा? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केवल बड़े कार्यक्रमों से चुनाव नहीं जीते जाते, बल्कि बूथ स्तर पर सक्रिय और उत्साहित कार्यकर्ता ही चुनावी जीत की सबसे बड़ी ताकत होते हैं।
भाजपा के संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच यदि मौजूदा स्थिति का आकलन किया जाए तो कई स्तरों पर निराशा दिखाई देती है। कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि प्रशासनिक स्तर पर उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुना जाता। वहीं, आम जनता के छोटे-बड़े कार्य न होने से कार्यकर्ताओं को लोगों के बीच असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का उत्साह पहले जैसा नहीं दिखाई देता।
संगठन के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों का भी मानना है कि यदि कार्यकर्ताओं की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और उन्हें सम्मान व प्रभावी भूमिका नहीं मिली, तो चुनावी रणनीति कमजोर पड़ सकती है। राजनीतिक दलों की सबसे बड़ी ताकत उनका समर्पित कार्यकर्ता होता है और जब वही कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस करने लगे तो इसका असर चुनावी परिणामों पर भी पड़ सकता है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व के सामने है कि जिस कार्यकर्ता ने वर्षों की मेहनत से पार्टी को फर्श से अर्श तक पहुंचाया, क्या वही आज की परिस्थितियों में खुद को इतना मजबूत महसूस कर रहा है कि 2027 में एक बार फिर भाजपा की चुनावी नैया पार लगा सके? आने वाले महीनों में इस सवाल का जवाब संगठन की सक्रियता और कार्यकर्ताओं के मनोबल से ही तय होगा।

✍️नागेंद्र सिंह अध्यक्ष फतेहपुर प्रेस क्लब

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