सवाल तो पूछेंगे❓
👉सरकार से ‘बेवफा’ हो रहीं आशा बहुएं! निजी नर्सिंग होमों से बढ़ रही नजदीकियां, स्वास्थ्य विभाग पर भी उठे सवाल!!
👉गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों के बजाय निजी संस्थानों में भेजने के आरोप, निगरानी व्यवस्था पर सवाल!!
फतेहपुर (वंदना टाईम्स)। जनपद की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के बीच अब आशा बहुओं की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। आरोप हैं कि सरकार की योजनाओं को घर-घर पहुंचाने और गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों तक ले जाने की जिम्मेदारी निभाने वाली कुछ आशा बहुएं अब सरकार से ‘बेवफा’ होती नजर आ रही हैं। चर्चा है कि ऐसी आशा बहुएं सरकारी अस्पतालों की बजाय निजी नर्सिंग होमों को अधिक प्राथमिकता दे रही हैं।
जनपद में करीब 2,446 आशा कार्यकर्ता कार्यरत हैं। इनका मुख्य दायित्व गर्भवती महिलाओं की देखभाल, सुरक्षित प्रसव, नवजात शिशुओं का टीकाकरण और सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाना है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि कुछ आशा बहुएं अपने मूल उद्देश्य से भटककर निजी नर्सिंग होमों के प्रति ज्यादा वफादार और सरकार के प्रति बेवफा साबित हो रही हैं।
आरोप है कि गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने के बजाय निजी नर्सिंग होमों में भेजा जा रहा है। चर्चा यह भी है कि इसके बदले कुछ आशा बहुओं को निजी संस्थानों से लाभ मिलता है। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह सरकार की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य योजनाओं के साथ बेवफाई मानी जाएगी और गरीब परिवारों के हितों पर भी सीधा असर पड़ेगा।
लोगों का कहना है कि जब आशा कार्यकर्ताओं की निगरानी करने वाला स्वास्थ्य विभाग का कार्यालय ही सवालों के घेरे में हो, तब सरकार से बेवफा हो चुकी आशा बहुओं पर लगाम कौन लगाएगा। ऐसे में सरकार की मंशा और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना मुश्किल होता दिखाई दे रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कुछ आशा बहुएं वास्तव में सरकार से बेवफाई कर निजी नर्सिंग होमों के हित में काम कर रही हैं, तो स्वास्थ्य विभाग और वरिष्ठ अधिकारी ऐसे मामलों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई कब करेंगे। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक सरकार की योजनाओं का उद्देश्य अधूरा ही नजर आएगा।
✍️नागेंद्र सिंह अध्यक्ष फतेहपुर प्रेस क्लब
