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फतेहपुर की राजनीति में लंबे समय से अपेक्षाकृत शांत दिखाई दे रहे पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल ने अहिल्याबाई होलकर जन्मशताब्दी समारोह के बहाने अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास किया है। हथगांव में आयोजित कार्यक्रम में जुटी भीड़ को राजनीतिक गलियारों में केवल एक सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है।
मुखलाल पाल का राजनीतिक सफर भारतीय जनता पार्टी के एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुआ था। वर्ष 2000 में युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने संगठन में लगातार जिम्मेदारियां संभालीं। जिला महामंत्री, क्षेत्रीय महामंत्री और क्षेत्रीय उपाध्यक्ष जैसे पदों पर रहते हुए उन्होंने संगठन में अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2017 में उन्हें राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का सदस्य भी बनाया गया तथा कई जिलों की संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
हालांकि उनके राजनीतिक जीवन का सबसे चर्चित दौर तब शुरू हुआ जब उन्हें भाजपा का जिलाध्यक्ष बनाया गया। जिलाध्यक्ष पद पर रहते हुए संगठन के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आई। कई मुद्दों पर उनका विरोध हुआ और विरोधी गुट के साथ उनका टकराव सार्वजनिक मंचों तक पहुंच गया। तामेश्वर मंदिर भूमि विवाद और अन्य स्थानीय मुद्दों पर उनकी सक्रियता समर्थकों के बीच लोकप्रिय रही, लेकिन संगठन के अंदर मतभेद लगातार बढ़ते गए।
आखिरकार बढ़ते विवादों और आरोप-प्रत्यारोप के बीच प्रदेश नेतृत्व ने उन्हें जिलाध्यक्ष पद से हटा दिया। इसके बाद से जिले की राजनीति में उनका प्रभाव पहले जैसा दिखाई नहीं दिया। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि पार्टी के कई कार्यक्रमों में उनकी भूमिका सीमित होती गई और संगठन के भीतर भी उन्हें अपेक्षित महत्व नहीं मिला।
ऐसे समय में अहिल्याबाई होलकर जन्मशताब्दी कार्यक्रम का आयोजन राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कार्यक्रम में पाल समाज की बड़ी भागीदारी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि मुखलाल पाल अभी भी अपने सामाजिक आधार पर प्रभाव रखते हैं। उनके समर्थक इसे उनकी राजनीतिक वापसी की शुरुआत मान रहे हैं, जबकि विरोधी इसे केवल सामाजिक आयोजन बताकर इसकी राजनीतिक महत्ता को कम करके आंक रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। ऐसे में पिछड़े वर्गों, विशेषकर पाल समाज जैसे संगठित सामाजिक समूहों की राजनीतिक भूमिका को नजरअंदाज करना किसी भी दल के लिए आसान नहीं होगा। यही कारण है कि मुखलाल पाल का यह शक्ति प्रदर्शन केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे एक व्यापक राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि भाजपा संगठन इस संकेत को किस रूप में लेता है। क्या पार्टी आगामी चुनावों को देखते हुए मुखलाल पाल और उनके सामाजिक आधार को फिर से सक्रिय भूमिका देने की कोशिश करेगी, या फिर वर्तमान राजनीतिक समीकरणों के साथ आगे बढ़ेगी। फिलहाल इतना तय है कि हथगांव का यह आयोजन फतेहपुर की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे गया है।
✍️ नागेंद्र सिंह अध्यक्ष फतेहपुर प्रेस क्लब
