फतेहपुर (वंदना टाईम्स)। मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन के पी सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में संपन्न हुआ ।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए के पी सिंह कछवाह ने वाणी वंदना में भाव प्रस्तुत करते हुए पढ़ा कि सरस्वती मां प्रार्थना, मांग रहे वरदान। राष्ट्र प्रेम सब में भरो, भारत बने महान। पुनः कार्यक्रम को गति देते हुए काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया- आशुतोष श्री शंभु का, सावन है प्रिय मास। मनवांछित फल पाइए,कर जप, तप उपवास ।डॉ. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया यमुना किनारे, राधा पुकारे। कहां हो कन्हैया, वंशी बजैया। आंखों के तारे, प्राणों से प्यारे।डॉ. विजय शंकर मिश्र ने अपने भावों को मुक्तक में कुछ इस प्रकार पिरोया- भारत की पुण्य भूमि, वीरों की है प्रसूता। सौ बार हम कहेंगे , ललकार कर कहेंगे ।
इसके लिए जिएंगे, इसके लिए मरेंगे, इसके लिए सदा ही, हर कष्ट हम सहेंगे। डॉ. शिवसागर साहू ने पढ़ा कि नभ से चल पावस की बूंदें, करतीं धरती का आलिंगन। सावन में शिव का भक्ति भाव, भरता मानव उर सुस्पंदन। प्रदीप कुमार गौड़ ने काव्य पाठ में अपने भावों को कुछ इस प्रकार शब्द दिए – ना घर- द्वार, न पैसा – कौड़ी , फिर भी हैं औघड़ दानी।
जिसने जो मांगा वह पाया, शिव हैं ऐसे वरदानी । राम अवतार गुप्ता ने पढ़ा- पावन सावन मास है, जाएं शिव के द्वार । शिव, शिव, शिव जपते रहें, कहत ‘राम अवतार’। काव्य गोष्ठी के आयोजक तथा संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने एक मुक्तक के माध्यम से अपने भाव कुछ इस प्रकार व्यक्त किये- शंकर जी का रूप ही, यह समस्त संसार। उनकी सच्ची भक्ति है , जीव- जगत से प्यार।
