“बड़े मियाँ तो बड़े मियाँ,छोटे मियाँ सुभान अल्ला”।। यह कहावत आप लोगों ने तो सुनी ही होगी। कहीं ना कहीं चरितार्थ भी हुई होगी। जनपद की पुलिस की जो कार्य शैली है उसमें भी यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठ रही है। यानी बड़े मियां की कौन कहे छोटे मियां तो अपने आप में ही बड़े बन गए।। अपराधिक घटनाओं का खुलासा हो या फिर ना हो शिकायतकर्ता संतुष्ट हो या फिर ना हो राजनेताओं की सुनो या फिर ना सुनो यह लोग किसी भी कीमत पर घमंड और पुलिसिया रौब से बाहर निकालना ही नहीं चाहते।
फतेहपुर जनपद में होने वाले अपराधों को लेकर पुलिस की जो चाल ढाल है उसमें न केवल पुलिस उलझती रही बल्कि पीड़ित भी पुलिसिया दांव पेच में फंसकर रह गए। ऐसे लोग जिनके यहां लाखों रुपए की चोरी हुई वह भी बड़े मियां और छोटे मियां के आश्वासनों के बीच फंसे रहे। अब जब बड़े मियां और छोटे मियां के किरदार में एक का जनपद से नाता छूट गया तो छोटे मियां की क्या स्थिति होगी वह अपने स्वभाव में परिवर्तन लाएंगे या नहीं यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
योगी सरकार की मंशा के अनुसार सबको न्याय मिले न्याय के साथ-साथ सबको सम्मान मिले सम्मान के साथ-साथ अधिकारी जरूरतमंदों के साथ खड़ा हो। लेकिन जनपद योगी की मंशा के अनुसार चलने को तैयार ही नहीं है सवाल तो ऐसे अधिकारियों से पूछा ही जाना चाहिए जो सरकार के उद्देश्यों के विपरीत जाने में संकोच नहीं कर रहे।
✍️ नागेंद्र सिंह अध्यक्ष फतेहपुर प्रेस क्लब
