फतेहपुर(वी.टी)। *बदलते रहे एसपी लेकिन आवास के पीड़ितों के लिए नहीं खुले दरवाजे!
*कप्तानों के मनमाने रवैया के आगे लाचार व बेबस नजर आए नेता!
*आमजन तो दूर सत्ताधारी तक बंगले में मिलने को रहे तरसते!
*एसपी बंगले के बंद दरवाजों के बाहर पीड़ितों का कराहता रहा न्याय!
*लोगों की कौन कहे खाकी तक के लिए मशक्कत से खुले कमांडर के आवास के पट!
*जारी रहेगी मनमानी की परंपरा या फिर रचे गए व्यूह को तोडेंगे अभिमन्यु!
*थानों में व्याप्त भ्रष्टाचार,खाकी की मनमानी से कराह रहे लोग!
*पीड़ितों को सुलभ न्याय दिलाना नवागत कप्तान के सामने बड़ी चुनौती!
*सरकार के निर्देश और अफसरों की खोखली बयानबाजी कि आमजन के लिए उनके दरवाजे हर समय खुले रहेंगे का पालन शायद ही कोई अधिकारी करता हो।फतेहपुर में लंबे समय से पुलिस अधीक्षक आवास में न्याय की आस लगाकर दूर दराज से आने वाले लोगों के लिए दरवाजे बंद चल रहे हैं। लोगों की बात कौन करे? खुद खाकी तक बंद दरवाजे के बाहर कमांडर के पट खुलने का इंतजार करती नजर आती रही है। कप्तान के आवास के बंद पटों को खुलवाने की चुनौती के आगे सब बेबस नजर आए। अब जिले की कमान अभिमन्यु मांगलिक को सौंपी गई है। देखना यह है कि पीड़ितों का न्याय कप्तान के आवास के बंद दरवाजों के बाहर दम तोड़ेगा या फिर आवास में लोगों से ना मिलने के रचे गए व्यूह को ‘अभिमन्यु’ तोड़ पाने में सफल होंगे।
शासन के निर्देश के बावजूद प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से आम जनता का मिलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा हो रहा है।जिले के बड़े अफसर तो कार्यालय में बैठे जरूर मिल जाएंगे लेकिन तहसील,विकास खंड एवं जिला मुख्यालय में ही बैठने वाले अन्य अधिकारियों के बंद दरवाजे सुलभ न्याय की परिकल्पना को तार-तार करते नजर आते हैं। राजस्व से अधिक पुलिस मामलों के पीड़ितों की लंबी लाइन मुख्यालय में बैठने वाले अफसरों की चौखटों तक दिखाई पड़ती है लेकिन एक लंबा अरसा ऐसा गुजर गया जिसमें पुलिस अधीक्षक अपने आवास में फरियादियों से कभी मिले ही नहीं।यह परंपरा क्यों पड़ी? किसने डाली? इसका उत्तर तो नहीं मिल सका लेकिन सरकार और अफसरों के वे वादे,दावे बेईमानी नजर आए जिसमें न्याय के लिए दरवाजे हर समय खुले रहने के बड़ी-बड़ी डींगें मारी जाती रहीं। आम जनता के लिए न्याय के दरवाजे बंद रखने की चली आ रही परंपरा को धवल जायसवाल,उदय शंकर सिंह ने आगे बढ़ाया तो अनूप कुमार सिंह ने दरवाजों की कुंडी जरा और मजबूती से बंद कर दी। यह सरकार के आदेशों की नाफरमानी रही, नेताओं की बेबसी या फिर आमजन का दुर्भाग्य कि पुलिस अधीक्षक आवास में लोगों से न मिलने की परंपरा को समाप्त नहीं किया जा सका।सत्ताधारियों तक की लाचारी ऐसी रही कि आमजन तो दूर वह खुद भी कमांडर से मिलने को तरसते रहे।
स्वयं खाकी ही आवास के बाहर दरवाजे खुलने का घंटों इंतजार भी करती नजर आई। व्यवस्था भले ही जन विरोधी रही हो सरकार विरोधी रही हो या फिर कमांडर रहे अनूप कुमार सिंह की मनमानी, आमजन के प्रति बेरुखी व उनके गुरुर के आगे सभी नतमस्तक रहे। थानों के भ्रष्टाचार व खाकी की मनमानी से आजिज पीड़ितों को सुलभ न्याय मिल सके, बंद दरवाजों की उस चलती चली आ रही परंपरा को जिले की कमान संभालने जा रहे नए पुलिस कप्तान अभिमन्यु मांगलिक आगे बढ़ाएंगे या फिर आमजन के लिए न्याय के दरवाजे वास्तव में एक बार फिर खुलेंगे। एक लंबा अरसा जिले में गुजर गया है जहां खाकी के गुरूर और रौब से तो जनता बखूबी वाकिफ हुई लेकिन जिस पुलिस मित्र के चेहरे के कसीदे कसे जाते हैं उसे देखने को लोग तरस गए। नवागत कप्तान अभिमन्यु के सामने कई चुनौतियों के साथ-साथ भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने, लोगों के लिए न्याय के दरवाजे खुले रखने की होगी।
