चाय की दुकान और अखिलेश यादव

सवाल तो पूछेंगे❓

👉चाय पर राजनीति !!

फतेहपुर जनपद में इन दिनों चाय पर चर्चा तो नहीं लेकिन चाय पर राजनीति जरूर हो रही है। दो पक्षों में हुई मारपीट में जिस तरह से पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को बीच में लाने का प्रयास किया गया उसे एक सोची समझी राजनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। मारपीट में शामिल दोनों पक्ष यदि सपा के ही परंपरागत समर्थक हो तो फिर अखिलेश यादव का नाम लेकर मारपीट करना केवल घटना को तूल देना ही कहां जाएगा।
यह मामला सुल्तानपुर घोष थाना क्षेत्र के बहेरा चौकी चौराहे का है। जहां कुछ दिन पहले दो पक्षों में मारपीट की घटना हुई थी।मारपीट एक चाय वाले के साथ हुई थी।मारपीट करने वाले मुस्लिम थे। जबकि चाय वाला यादव। मारपीट का कारण चाय देने को लेकर बताया जा रहा है। विगत माह पूर्व मुख्यमंत्रीअखिलेश यादव के एक शादी समारोह में जाते समय कार्यकर्ताओं ने यहां रोक कर उन्हें इसी चाय की दुकान की चाय पिलाई थी। अखिलेश यादव के चाय पीने की बात को अब झगड़े का कारण बताने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है और यह कहने पर जोर दिया जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री को चाय पिलाई है तो फिर अंजाम भी भुगतो। इलाके के सूत्रों की माने तो दोनों पक्ष सपा के ही समर्थक हैं तो फिर विशुद्ध राजनीति का तड़का लगाकर घटना को अधिक से अधिक तूल देने की कोशिश नहीं तो फिर और क्या है। इसी बीच खाद्य निरीक्षक द्वारा इसी चाय की दुकान का निरीक्षण करने व नमूना भरने की बात पूर्व मुख्यमंत्रीअखिलेश यादव के चाय पीने की बात को जोड़ दिया गया जब की निरीक्षण आइजीआरएस में हुई शिकायत के बाद किया गया था।
सवाल तो ऐसे लोगों से पूछना चाहिए जिन्होंने चाय पीने वह पिलाने को लेकर हुए झगड़े को राजनीति से जोड़दियाऔर अब इस झगड़े को तूल देने की कोशिश भी कर रहे है।

✍️नागेंद्र सिंह अध्यक्ष फतेहपुर प्रेस क्लब

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