फतेहपुर(वी.टी)। सिद्धपीठ तांबेश्वर मंदिर परिसर में संवेदना सेवा न्यास के सहायतार्थ आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव के तीसरे दिन रामलला के जन्मोत्सव का भावपूर्ण वर्णन हुआ। पूज्य आचार्य शांतनु जी महाराज द्वारा जैसे ही भगवान श्रीराम के प्राकट्य की कथा सुनाई गई, पूरा कथा स्थल “जय श्रीराम” के जयकारों से गूंज उठा। आचार्य शांतनु जी महाराज ने कहा कि भगवान के जन्म के समय देवताओं ने आकाश मार्ग से पुष्पवर्षा की और अयोध्या उत्सव में डूब गई। उन्होंने बताया कि प्रभु को पाने के लिए किसी प्रकार के दिखावे की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि सच्चे मन से भक्ति ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग है। अयोध्यावासियों के उदाहरण से उन्होंने समझाया कि भगवान के दर्शन के लिए आत्मिक दौड़ जरूरी है। कथा के दौरान भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं, रूप सौंदर्य और नामकरण संस्कार का सुंदर वर्णन किया गया। महाराज जी ने कहा कि नाम का व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए नामकरण सोच-समझकर, शास्त्रों और संतों की सलाह से किया जाना चाहिए। उन्होंने वैदिक गुरुकुल शिक्षा पद्धति की प्रासंगिकता बताते हुए कहा कि आज शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों की भी आवश्यकता है, तभी सशक्त भारत का निर्माण संभव है।विश्वामित्र यज्ञ रक्षा प्रसंग में महाराज जी ने कहा कि जीवन रूपी यज्ञ की रक्षा के लिए राम अर्थात सत्य और लक्ष्मण अर्थात त्याग व वैराग्य का साथ आवश्यक है। अहिल्या उद्धार प्रसंग के माध्यम से उन्होंने संदेश दिया कि पाप को छुपाने के बजाय गुरु या संत के समक्ष स्वीकार करने से जीवन का कल्याण होता है। कथा में पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति भी शामिल हुईं और श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की। इस अवसर पर रुक्मणी गुप्ता, रीता अनूप अग्रवाल सहित अर्चना त्रिपाठी, सरोज राम प्रकाश सिंह, अवधेश त्रिपाठी, रविकरण श्रीवास्तव समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता, भाजपा पदाधिकारी एवं संवेदना सेवा न्यास के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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रामलला के जन्मोत्सव पर पुष्पवर्षा, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा कथा स्थल
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