सवाल तो पूछेंगे❓
👉 छोटा झगड़ा,बड़े नेताओं की एंट्री, जातिय संघर्ष जैसा माहौल बनाने की हुई कोशिश!!
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फतेहपुर जनपद का बहेरा चौकी चौराहा जो राणा प्रताप चौराहे के नाम से भी जाना जाता है। सुल्तानपुर घोष थाना क्षेत्र में आने वाला यह चौराहा इन दिनों लखनऊ से लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। चाय पर होने वाली चर्चा जो अब राजनीति का अखाड़ा बन चुकी है कुछ झूठ,कुछ सच इन दोनों बातों से जो माहौल बनाया गया उसमें इलाकाई नेताओं ने जातिय संघर्ष कराने की कोशिश तो की लेकिन क्षेत्रीय जनता ने ऐसा माहौल बनने नहीं दिया। पुलिस ने भी हवा में तैरने वाली अफवाहों को लोगों के दिलों दिमाग तक पहुंचने नहीं दिया।
बात 17 अप्रैल की है जब एक मुस्लिम युवक बहेरा चौकी चौराहा(राणा प्रताप चौराहा) पर स्थित चाय की दुकान में चाय पीने गया था। युवक ने दुकान पर बैठकर आराम से चाय पी और चाय पीने के बाद₹500 चाय वाले को देने लगा₹500 का छुट्टा ना होने की बात को लेकर दोनों में बहस होने लगी बहस इतनी बढ़ गई थी कि दुकानदार ने ही चाय पीने वाले युवक के गाल पर एक तमाचा जड़ दिया यह बात युवक को काफी बुरी लगी। इजुरा बुजुर्ग का रहने वाला यह युवक घर जाकर अपने साथ कुछ लोगों को लेकर दुकानदार के यहां आ धमका और बात विवाद होने लगा।लोगों की माने तो दूसरी बार जमकर कहा सुनी तो हुई लेकिन मारपीट नहीं हुई। युटुबर होने के कारण चाय वाले ने चाय के सारे बर्तनों को फेंकना शुरू कर दिया और वीडियो बना लिया। यह बात हवा में फैला दी कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यहां चाय पी है इसी बात को लेकर मेरे साथ मारपीट की गई।
मारपीट की जानकारी जैसे ही बजरंग दल के नेताओं को लगी वे चौकी चौराहा पहुंचकर चाय वाले को थाने लेकर पहुंच गए और मुकदमा दर्ज कर दिया लेकिन जब समाजवादी पार्टी को यह जानकारी हुई कि चाय वाला तो यादव है तो इन लोगों ने सारे मामले को हाईजैक कर लिया फिर क्या था इस बात की जानकारी आनन फानन में सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को दे दी गई। इसी बीच खाद्य निरीक्षक की भी एंट्री हो गई जो सपाइयों के लिए आग में घी डालने जैसा मामला मिल गया और यह हवा फैला दी गई कि अखिलेश यादव यदि चाय की दुकान में चाय ना पिए होते तो खाद निरीक्षक छापा ना मारा होता।
चाय की दुकान से शुरू बवाल ने जो रूप लिया वह लखनऊ तक पहुंच गया। एम -वाई के बीच का झगड़ा था। सच्चाई को स्वीकारने के बदले इसे प्रदेश के एक पूर्व मंत्री के ऊपर डाल दिया गया। और यह कहां जाने लगा कि पूर्व मंत्री की सह पर चाय वाले की पिटाई की गई इतना ही नहीं पूर्व मंत्री पर कई ऐसे आरोप लगाए गए जिसका ना तो कोई सबूत है और ना ही कोई आधार। यह बात पूर्व मंत्री ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहीं। क्योंकि आरोप समाजवादी पार्टी कार्यालय में हुई एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान लगाए गए थे वह भी सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा तो इसका हवा की तरह फैलना भी वजीब था।
अब फिर वही राणा प्रताप चौकी चौराहा वही चाय की दुकान और रोजमर्रा की तरह चाय पीने वालों का आना जाना यह बताने में तनिक भी चूक नहीं कर रहा की जो कुछ भी हुआ वह शुद्ध राजनीति के अलावा कुछ भी नहीं था। छोटे झगडे में बड़े राजनीतिक लोग का कूदना ही स्थिति को विस्फोटक बना दिया । अब सब कुछ शांत है।
सवाल तो ऐसे क्षेत्रीय नेताओं से पूछा जाना चाहिए कि जिन्होंने गलत सही अफवाह उड़ा कर क्षेत्र में जातिय हिंसा फैलाने की कोशिश की हो, अपने वरिष्ठ नेताओं के सामने झूठ परोस कर क्षेत्र का माहौल बिगाड़ने की पिच तैयार कर दी हो। हमें जो जानकारी मिली उस जानकारी को आपके सामने रख दिया है बाकी फैसला तो आम जनता को करना है। यह पब्लिक है सब जानती है!!
✍️नागेंद्र सिंह अध्यक्ष फतेहपुर प्रेस क्लब
