80 हजार से अधिक सवर्ण मतदाताओं के रुख पर टिकी निगाहें, 2027 से पहले गरमाया सियासी माहौल

अयाह शाह में सवर्ण मतदाताओं की नाराजगी ने बढ़ाई भाजपा की चिंता अयाह शाह में भाजपा के सामने सवर्ण नाराजगी बनी चुनौती


फतेहपुर (वंदना टाईम्स)। अयाह शाह विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी चर्चाएं अभी से तेज होने लगी हैं। भाजपा के परंपरागत समर्थक माने जाने वाले सवर्ण मतदाताओं के बीच नाराजगी की चर्चाओं ने चुनावी समीकरण को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। सवाल उठ रहा है कि यदि यह नाराजगी मतदान तक कायम रहती है तो क्या इसका असर भाजपा के चुनावी समीकरण पर पड़ सकता है?
फतेहपुर जनपद की अयाह शाह विधानसभा सीट पर वर्ष 2017 से भाजपा का कब्जा है। यहां से विकास गुप्ता भाजपा प्रत्याशी के रूप में लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने यह सीट अपने कब्जे में बरकरार रखी थी। हालांकि पिछले चुनाव में जीत का अंतर वर्ष 2017 की तुलना में काफी कम हुआ। 2022 में भाजपा के विकास गुप्ता को 71,231 वोट मिले थे, जबकि सपा प्रत्याशी विशंभर प्रसाद निषाद को 58,225 मत प्राप्त हुए थे। दोनों के बीच जीत का अंतर 13,000 वोट रहा था।
मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक अयाह शाह विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,51,626 मतदाता हैं। इनमें करीब 1,40,000 पुरुष और लगभग 1,11,000 महिला मतदाता शामिल हैं। वहीं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार क्षेत्र में सवर्ण मतदाताओं की संख्या 80,000 से अधिक बताई जा रही है। इतनी बड़ी संख्या में सवर्ण मतदाता होने के कारण विधानसभा की चुनावी राजनीति में इस वर्ग की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अयाह शाह की राजनीति में सवर्ण मतदाता लंबे समय से अहम भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले इस वर्ग के बीच नाराजगी की चर्चाएं भाजपा के लिए परेशान करने वाला है। हालांकि, अभी यह नहीं कहा जा सकता है कि नाराजगी कितनी व्यापक है और मतदान के समय इसका वास्तविक प्रभाव किस रूप में सामने आएगा।
वर्ष 2017 में भाजपा की जीत का अंतर काफी बड़ा था, जबकि 2022 में मुकाबला अपेक्षाकृत करीबी रहा। यही वजह है कि 2027 के चुनाव को लेकर पिछले चुनाव के आंकड़ों और बदलते सामाजिक समीकरणों पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं। क्षेत्र में सड़क, रोजगार, शिक्षा, विकास कार्य और स्थानीय समस्याएं भी चुनावी चर्चा का हिस्सा बन सकती हैं।
राजनीतिक जानकारों के बीच चर्चा यह भी है कि यदि भाजपा समय रहते अपने समर्थक मतदाताओं के बीच पैदा हुई नाराजगी को दूर करने में सफल रहती है तो मौजूदा सामाजिक समीकरण आगे भी कायम रह सकता है। वहीं यदि नाराजगी मतदान तक बनी रहती है तो चुनावी मुकाबले में इसका असर देखने को मिल सकता है। दूसरी ओर विपक्षी दल इस संभावित असंतोष को अपने पक्ष में कितना परिवर्तित कर पाते हैं, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल 2027 का चुनाव अभी दूर है और मतदाताओं का अंतिम रुख सामने आने में समय है। लेकिन 2.51 लाख से अधिक मतदाताओं और 80 हजार से ज्यादा सवर्ण मतदाताओं वाली अयाह शाह विधानसभा में बदलते राजनीतिक समीकरणों ने चुनावी चर्चा जरूर तेज कर दी है।

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