रेखा मिश्रा के पति पर मुकदमों से भाजपा की बढ़ी मुश्किलें, नेतृत्व की चुप्पी पर सवाल

सवाल तो पूछेंगे❓

अपनों ने भाजपा को चौराहे पर खड़ा किया, अब भस्मासुर बनने लगा अवधेश प्रकरण!!

FIR दर FIR से भाजपा की किरकिरी!!
रेखा मिश्रा के पति अवधेश मिश्रा को लेकर पार्टी के सामने ‘न उगलने, न निगलने’ की स्थिति!!

फतेहपुर (वंदना टाईम्स)। पहले से ही प्रशासनिक उपेक्षा, पार्टी के अंदर की गुटबाजी, हताश-निराश कार्यकर्ताओं और संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रही भाजपा को अब अपनों ने ही कहीं का नहीं छोड़ा है। भाजपा जिला उपाध्यक्ष रेखा मिश्रा के पति अवधेश मिश्रा पर दर्ज हुए मुकदमों ने पार्टी की जमकर किरकिरी करा दी है। हालात ऐसे बन गए हैं कि भाजपा के लिए अवधेश मिश्रा का मामला ‘न उगलते बन रहा है, न निगलते’।
अवधेश मिश्रा पर अलग-अलग मामलों में रुपये के लेनदेन, हेराफेरी और कथित धोखाधड़ी से जुड़े मुकदमे दर्ज हुए है। जहानाबाद थाने में दर्ज मुकदमे के बाद शिकायतकर्ता प्रतीक मालवीय फतेहपुर मुख्यालय पहुंचकर बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेखा मिश्रा और उनके पति अवधेश मिश्रा पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर अवधेश मिश्रा की ओर से अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है।
अवधेश मिश्रा के खिलाफ रुपये के लेनदेन और कथित धोखाधड़ी से जुड़ा एक मुकदमा कानपुर में भी दर्ज हुआ था। इतना ही नहीं, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि भाजपा के ही एक पूर्व मंत्री से जुड़े लेनदेन का मामला भी अवधेश मिश्रा से जुड़ा हुआ है।
राजनीतिक रूप से देखा जाए तो एक के बाद एक सामने आ रहे विवादों ने भाजपा संगठन की मुश्किलें जरूर बढ़ा दी हैं। पार्टी पहले से ही प्रशासनिक उपेक्षा और अंदरूनी गुटबाजी जैसे सवालों से घिरी हुई है। ऐसे समय में पार्टी से जुड़े एक परिवार पर लग रहे आरोप संगठन के लिए नया नासूर बनता दिखाई दे रहा हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला और प्रदेश नेतृत्व इस पूरे प्रकरण को लेकर आखिर किस तरह का रुख अपनाता है? एक तरफ रेखा मिश्रा पार्टी की जिला उपाध्यक्ष हैं, तो दूसरी तरफ उनके पति अवधेश मिश्रा पर लगातार गंभीर आरोप और मुकदमों की चर्चा भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा कर रही है।
ऐसे में भाजपा एक ऐसे चौराहे पर खड़ी दिखाई दे रही है, जहां उसे समझ नहीं आ रहा कि इस विवाद से किस तरह पार पाया जाए। पार्टी के भीतर यदि समय रहते इस मामले को लेकर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया गया तो यही विवाद आगे चलकर अवधेश मिश्रा भाजपा के लिए ‘भस्मासुर’ साबित होसकते है।
सवाल यह भी है कि जब भाजपा पहले से ही कई मोर्चों पर जूझ रही है, तो फिर एक नई मुसीबत को नासूर बनने का इंतजार क्यों किया जा रहा है?

✍️ नागेंद्र सिंह अध्यक्ष फतेहपुर प्रेस क्लब

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