सवाल तो पूछेंगे❓
✍️फतेहपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोल-डीजल की बचत को लेकर की गई अपील और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्वयं उसका पालन करने तथा आम जनता से सहयोग की अपील के बावजूद जिले में कई अधिकारी और कर्मचारी अब भी इस दिशा में गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो जनपद के कई विभागों में कार्यरत अधिकारी व कर्मचारी गैर जनपदों से प्रतिदिन निजी वाहनों के माध्यम से आना-जाना कर रहे हैं। इनमें कई कर्मचारी ऐसे हैं जिन्होंने कानपुर और प्रयागराज जैसे शहरों में अपना स्थायी निवास बना रखा है, जबकि उनकी तैनाती फतेहपुर जिले के तहसील, ब्लॉक और जिला मुख्यालयों में है।
बताया जाता है कि जिले के 13 विकासखंडों और विभिन्न तहसील मुख्यालयों में तैनात कई कर्मचारी प्रतिदिन लंबी दूरी तय कर ड्यूटी पर पहुंचते हैं। खासकर खागा तहसील क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक कर्मचारियों के रोजाना बाहर से आने-जाने की चर्चा बनी हुई है। इससे न केवल पेट्रोल और डीजल की खपत बढ़ रही है, बल्कि सरकारी कार्यों और विकास योजनाओं के संचालन पर भी प्रभाव पड़ने की बात सामने आ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री स्वयं ईंधन बचत का संदेश दे रहे हैं, तब सरकारी तंत्र में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इसका पालन करना चाहिए। लोगों का मानना है कि यदि अधिकारी-कर्मचारी अपने कार्यस्थल के निकट निवास करें तो समय की बचत के साथ-साथ ईंधन की खपत में भी कमी आएगी और सरकारी कार्यों में तेजी दिखाई देगी।
जानकार बताते हैं कि यह समस्या नई नहीं है। पूर्व में कई जिलाधिकारियों ने कर्मचारियों के बाहरी जनपदों से आवागमन पर रोक लगाने के प्रयास किए, लेकिन व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं हो सका। अब जबकि देशभर में ईंधन बचत पर गंभीरता दिखाई जा रही है, ऐसे में यह मुद्दा फिर चर्चा का विषय बन गया है।
लोगों का कहना है कि जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर पर तैनात कर्मचारियों के नियमित आवागमन की समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की अपील का वास्तविक पालन सुनिश्चित हो सके।
ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों से सवाल पूछा जाना चाहिए कि जो अपने पदग्रहण स्थान में ना रुककर गैर स्थानो सेआकर नौकरी कर रहे हैं और पीएम और सीएम की अपील का मजाक उड़ाकर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं।
👉नागेंद्र सिंह अध्यक्ष फतेहपुर प्रेस क्लब
