सवाल तो पूछेंगे❓
👉 मौरंग की ओवरलोडिंग मजबूरी या फिर………! फतेहपुर जनपद में मौरंग की ओवरलोडिंग का मामला कोई नया नहीं काफी पुराना है। जो अब लाइलाज बन चुका है। इस खेल में न केवल एन जी टी के नियमों की धनजियां उड़ाई जा रही है बल्कि करोड़ों रुपयो का चूना सरकार को लगाया जा रहा है। इतना ही नहीं ग्रामीण इलाकों से निकलने वाले ओवरलोड वाहनों से आए दिन दुर्घटनाएं भी हो रही है जिसके चलते ग्रामीणों और वाहन चालकों के बीच विवाद होना आम बात हो गई है।
अवैध खनन हो या फिर ट्रकों में होने वाली यमुना बालू की ओवर लोडिंग, इस खेल में खनन माफियाओं से लेकर, खनन विभाग उप संभागीय परिवहन, तहसील स्तरीय प्रशासन के आपसी तालमेल से भी इनकार नहीं किया जा सकता। तभी खागा तहसील और फतेहपुर मुख्यालय से बेधड़क ट्रक यमुना बालू की ओवरलोडिंग के बाद निकलने में कामयाब हो रहे हैं। दिन हो या फिर रात हर समय ट्रकों में यमुना बालू की ओवर लोडिंग देखी जा सकती है।
जनपद में इन दिनों कोर्रा, ओती-संगोलीपुर, अड़वाल मैं यमुना नदी से मौरंग निकालने की बात बताई जा रही है। जिन स्थानों पर यमुना नदी से मौरंग निकली जा रही है वहां सारे नियम कानून की धनजियां उड़ाई जा रही हैं। बड़ी-बड़ी मशीनों के साथ एनजीटी के नियमों की कि जा रही अवहेलना खनन विभाग पर जोरदार तमाचा है।
ऐसा नहीं है कि अवैध खनन व ओवरलोड वाहनों के खिलाफ अभियान ना चलाया गया हो यहां तक प्रदेश की एसटीएफ ने भी ओवरलोड वाहनों के खिलाफ अपना अभियान चलाया था। अभियान के बाद कुछ दिनों तक असर दिखा लेकिन बाद में फिर खनन विभाग व मौरंग माफियाओं की तालमेल का ही नतीजा है कि सड़कों में ओवरलोड वालों का दौड़ना शुरू हो गया और ग्रामीणों पर वाहन चालकों की गुंडाई जगह-जगह देखने को मिलने लगी।
अब सवाल यह है कि जब खनन विभाग से लेकर उप संभागीय परिवहन अधिकार और तहसील स्तरीय प्रशासन को अवैध खनन व ट्रकों की ओवर लोडिंग को बन्द करने की जिम्मेदारी सौंपी है तो फिर एसटीएफ के आने के बाद अवैध खनन और ओवर लोडिंग पर पूरी तरह से रोक क्यों नहीं लगाई जा सकी।
✍️ नागेंद्र सिंह अध्यक्ष फतेहपुर प्रेस क्लब
