अंकित के कबूलनामें के बाद बड़ी बाग में दफन हो गया अधिवक्ता जयराज की मौत का राज!

हाई प्रोफाइल मर्डर का खुलासा हुआ जरूर पर हत्या की मिस्ट्री है बरकरार ! 

जमींदार की हत्या के कई अनसुलझे सवालों की उलझन में है लोग ! 

जमीन की नाप और हत्या के तरीके को भी नहीं पचा पा रहे जनपदवासी ! 

किसके लिए हो रही थी जमीन की नाप और कौन था सौदागर अपनी डिमांड नहीं जमीन का ऑफर प्राइस पूंछते थे जयराज ! 

कई खादीधारी एवं जमीन कारोबारी खरीदना चाहते थे बड़ी बाग ! 

कईयों से हो चुकी थी वार्ता 2 करोड़ तक पहुंच गया था जमीन का भाव पर नहीं हुआ सौदा ! 

पुलिस का दावा बंद नहीं होगी तफ्सीस!

पर्दे के पीछे अगर हत्या के हैं साजिशकर्ता तो किसे बचा ले गया अंकित!

 फतेहपुर (वी.टी)। शहर के हाई प्रोफाइल जयराज मानसिंह के मर्डर मिस्ट्री को पुलिस ने 48 घंटे के अंदर राजफाश कर दिया।खुलासे में मर्डरर अंकित ने जो कहानी बताई है वह थोड़ा अटपटी थोड़ा संदेह पैदा करने वाली तो थोड़ी मनगढ़ंत सी प्रतीत होती है लेकिन हत्या की गुत्थी से जब परिजन संतुष्ट हैं और हत्यारा बता रहे हैं तो फिर अंकित मिश्र ने हत्या का जो कबूलनामा किया है उसके बाद जयराज की मौत का राज बड़ी बाग में ही दफन हो गया।पर सवाल खड़ा जरूर है कि अंकित ने जो कहानी बताई है उसकी पटकथा किसी दूसरे ने लिखी है या फिर खुद की सच्ची स्टोरी है लेकिन लोगों के जेहन में सवाल यह बार-बार कौंध रहा है कि हत्या का कारण हत्या करने के तरीके और राज छिपाने का जो तरीका अपनाया गया क्या वास्तव में जो बताया गया वही सही है या हकीकत कुछ और है! हलांकि पुलिस ने अभी और तफ्सीस की बात की है लेकिन इतना तय है कि खुलासा भले ही जयराज की मौत का हो गया हो लेकिन मिस्ट्री अभी बरकरार है। शहर के मानसिंह परिवार की गिनती जमींदारों एवं रसूखदारों में होती है। इस खानदान के एक नूर जयराज मानसिंह भी रहे हैं। पेशे से अधिवक्ता लेकिन अपनी जमीनों की बिक्री का भाव आसमान तक ले जाने के महारथी रहे जयराज का अंत इतना दर्दनाक होगा यह किसी ने सोचा नहीं था। गत 21 जनवरी को जैसे ही उनकी हत्या की सूचना सिविल लाइन के पुलिस अधीक्षक आवास से सटे बंगले तक पहुंची तो परिजन ही नहीं हर कोई सुनने वाला दंग एवं सन्न रह गया। फिजा में हत्या के कारणों की चर्चा लोग गली कूंचों तक करते रहे। अपने-अपने तरीके से उनके स्वभाव,चाल,चरित्र का आकलन कर हत्या के कारणों के लोग कयास लगाते रहे क्योंकि मामला रसूखदार परिवार से था तो पुलिस की तेजी यह बताने के लिए काफी थी कि खुलासा जल्द ही हो जाने वाला है। हत्या के पीछे घर से साथ लेकर जाने वाले काफी समय से सहयोगी के रूप में रहे अंकित मिश्र की ओर शक की सुई जा रही थी। पुलिस ने उसे उठाया भी।मृतक की पत्नी शहनाज की ओर से उसे नामजद भी कर दिया गया लेकिन पुलिस हर उस एंगल पर काम करना चाह रही थी जिस ओर कातिल ने इशारे किए थे। सीधी और सपाट बताई गई हत्या की कहानी पर पुलिस आगे बढ़ी तो हत्या के कारण हत्या में प्रयुक्त चाकू सहित अन्य सामग्री को बरामद कर घटना का खुलासा कर दिया गया। पर सवाल वहीं खड़ा हो गया कि क्या वास्तव में जिस व्यक्ति का परिवार जयराज के टुकड़ों पर पल रहा हो वह इतना बड़ा कदम उठाएगा? पुलिस ने जो प्रेस रिलीज किया है अगर उसी की बात की जाए तो एक महीने पहले रची गई हत्या की कहानी, चाकू की खरीद,चाकू कमर में खोंसकर हत्यारे के मृतक के घर तक पहुंचने की बातें थोड़ा कम ही हजम हो रही है। जयराज को मारने के तरीके से भी सवाल खड़े हो रहे हैं?कि पीछे से वार के बाद कोई भी व्यक्ति जान बचाने के लिए भागेगा जरूर और जब चाकू का गंभीर घाव होगा तो खून की छींटें दूर तक होंगी। मौका यह बता रहा है जैसे बाकायदा जयराज को पकड़ कर उनका गला रेंता गया। हत्यारे ने यह भी कबूल किया कि वह घर गया खून साफ किया।चाकू छिपाई और फिर वापस आया इस बीच घर वाले कहां थे? और उनसे क्या पूंछतांछ हुई। अगर घर वालों को पता था कि खून से सने कपड़े और चाकू लेकर उनकी सफाई घर में हो रही है तो हत्या के इस राज को छिपाने में क्या घर वालों से पूंछताछ नहीं होनी चाहिए? चाकू कहां से ली गई? क्या इसकी पूंछतांछ की गई! अपने स्वभाव के अनुकूल जयराज के जमीन का सौदा करने का अपना तरीका था। वह अपना दाम नहीं बताते थे कि उन्हें क्या चाहिए? बल्कि खरीदार से ऑफर प्राइस पूछते थे। यही अदा उनकी जमीन के भाव को आसमान तक पहुंचाने का काम करती थी। कई खादीधारी,जमीन के कारोबारी बड़ी बाग को लेने के इच्छुक थे। कई चरणों में कईयों से वार्ता हो चुकी थी। सौदे बनें और बिगड़े। 1 करोड़ बीघा की डिमांड 2 करोड़ तक पहुंच गई लेकिन अंततः सौदा फिर भी नहीं हो पाया। सवाल यह भी है कि न तो अंकित राजस्व विभाग से संबंधित नाप-जोख का माहिर है और न स्वयं जयराज थे तो फिर नाप कौन कर रहा था? और नाप किसकी हो रही थी। संभव है कि वहां और लोग मौजूद रहे हों जिनका अपना स्वार्थ सिद्ध हो रहा हो। घटना पूरी सोंचीसमझी रणनीति के तहत की गई लेकिन पर्दे के पीछे क्या हत्यारे के साथ और भी लोग मौजूद थे?उसकी तफ्सीस जरूरी है। अगर और लोगों की मौजूदगी रही है तो उन्हें अंकित बचा क्यों रहा है?मृतक के बाद उसकी पत्नी और बेटी के नाम ही जमीन जानी है तो फिर जयराज के हिस्से की जमीन से भी अंकित को कुछ हासिल होने वाला नहीं है। कहीं कोई जमीन कारोबारी से जयराज का पैसे का लेन-देन या जमीन लेने की व्याकुलता या फिर वास्तव में अंकित के बदले मिजाज ने जयराज मानसिंह को मौत के मुहाने तक ला खड़ा किया।जिस जमीन को जयराज सोने के भाव बेचना चाह रहे थे। उन्हें सोना तो हांथ नहीं लगा लेकिन उनकी कर्मस्थली और कार्यस्थल रहा बड़ी बाग कब्रगाह जरूर बन गया।

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