फतेहपुर (वंदना टाइम्स)। मुख्य चिकित्सा अधिकारी यू.बी. सिंह की कार्यशैली और प्रशासनिक व्यवहार को लेकर जिले के चिकित्सा अधीक्षकों, सीएचसी और पीएचसी प्रभारियों समेत अन्य चिकित्साधिकारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को चिकित्साधिकारियों ने सामूहिक रूप से सीएमओ को ज्ञापन सौंपकर कार्यप्रणाली में सुधार करने और प्रभारी चिकित्साधिकारियों को उनके अधिकारों के अनुरूप स्वतंत्र रूप से कार्य करने का वातावरण उपलब्ध कराने की मांग की। सुधार न होने पर सभी प्रभारी चिकित्साधिकारी और चिकित्सा अधीक्षक प्रशासनिक प्रभार छोड़ने की चेतावनी दी है।
ज्ञापन में चिकित्साधिकारियों ने आरोप लगाया कि सीएमओ के कार्यभार ग्रहण करने के बाद से प्रभारी चिकित्साधिकारियों के अधिकारों में अनावश्यक हस्तक्षेप किया जा रहा है। कर्मचारियों के अवकाश स्वीकृत होने के बावजूद उन्हें अनुपस्थित दर्शाने, बिना पूर्व नोटिस वेतन रोकने, बार-बार स्पष्टीकरण मांगने तथा निरीक्षण के दौरान मामूली कमियां मिलने पर कार्रवाई करने से अधिकारियों और कर्मचारियों पर मानसिक दबाव बन रहा है।
चिकित्साधिकारियों ने स्थानांतरण और पदस्थापन के आदेशों में बार-बार बदलाव, वरिष्ठ चिकित्साधिकारियों की अनदेखी और कनिष्ठ चिकित्साधिकारियों को महत्वपूर्ण प्रभार दिए जाने पर भी आपत्ति जताई। ज्ञापन में रात नौ बजे वीडियो कॉल के माध्यम से अधिकारियों की उपस्थिति जांचने, निरीक्षण के दौरान संविदा कर्मियों के खिलाफ संविदा समाप्ति का प्रस्ताव देने का दबाव बनाने और पुराने वित्तीय अभिलेख बार-बार मांगे जाने का भी उल्लेख किया गया है।
वहीं, महिला चिकित्साधिकारियों के मानसिक तनाव का मुद्दा भी ज्ञापन में उठाया गया है। चिकित्साधिकारियों का कहना है कि परिस्थितियों से परेशान होकर डॉ. अपूर्वा पाल और डॉ. शिवानी बाजपेयी करीब 14 वर्षों की शासकीय सेवा के बाद त्यागपत्र देने की स्थिति में पहुंच गई हैं। कई अन्य चिकित्साधिकारी भी प्रशासनिक प्रभार छोड़ने पर विचार कर रहे हैं।
चिकित्साधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य स्वास्थ्य विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था को बाधित करना नहीं, बल्कि अधिकारियों को आवश्यक अधिकार, सम्मान और सहयोग के साथ कार्य करने का वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ और प्रभारी चिकित्साधिकारियों को उनके पद के अनुरूप प्रशासनिक अधिकार नहीं दिए गए तो सभी प्रभारी चिकित्साधिकारी एवं चिकित्सा अधीक्षक सामूहिक रूप से प्रशासनिक प्रभार से मुक्त होकर केवल चिकित्सकीय दायित्वों का निर्वहन करने को बाध्य होंगे।
मामले की प्रतिलिपि जिलाधिकारी फतेहपुर सहित लखनऊ शासन और प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के पदाधिकारियों को भी भेजी गई है। चिकित्साधिकारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और अधिकारों में अनावश्यक हस्तक्षेप पर रोक लगाने की मांग की है। इस दौरान डॉ. राजन सिंह, डॉ. के.के. सिंह, डॉ. नीरज गुप्ता, डॉ. विमल शुक्ला, डॉ. देवराज सिंह समेत बड़ी संख्या में चिकित्सक मौजूद रहे।
