सवाल तो पूछेंगे❓
👉प्रायोजित प्रदर्शन की चर्चा के बीच छात्रों की जायज मांगें बनीं बड़ा मुद्दा!!
फतेहपुर (वंदना टाईम्स)। किशनपुर स्थित सर्वोदय विद्यालय में छात्र-छात्राओं द्वारा किया गया प्रदर्शन पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया। छात्रों के हाथों में तख्तियां और उन पर लिखे नारे इस बात की ओर इशारा कर रहे थे कि प्रदर्शन को संगठित और सुनियोजित तरीके से आयोजित किया गया था। इसे लेकर प्रदर्शन के पीछे साजिश और प्रायोजित होने की चर्चाएं भी तेज रहीं।
बताया जा रहा है कि विद्यालय में बिजली, पेयजल, शौचालय तथा छात्रों के बैठने के लिए मेज-कुर्सी जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर छात्र-छात्राओं ने विद्यालय परिसर के बाहर धरना शुरू कर दिया। नारेबाजी और तख्तियों के साथ हुए इस प्रदर्शन ने जिला और तहसील प्रशासन की चिंता बढ़ा दी। चर्चा यह भी रही कि कुछ लोग सोशल मीडिया के माध्यम से इस प्रदर्शन को व्यापक रूप देकर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर जैसे बड़े आंदोलन का स्वरूप देने की कोशिश कर रहे थे।
हालांकि जिला अधिकारी निधि गुप्ता वत्स ने समय रहते हस्तक्षेप किया। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर छात्रों की समस्याएं सुनीं और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। प्रशासन की तत्परता के बाद छात्रों ने अपना धरना और प्रदर्शन समाप्त कर दिया।
प्रदर्शन के प्रायोजित होने या साजिश की चर्चाओं से अलग यदि देखा जाए तो छात्रों की मांगें पूरी तरह मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी थीं जो जायज है।ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब विद्यालय की समस्याएं लंबे समय से चली आ रही थीं और संबंधित विभाग को इसकी जानकारी भी थी, तो उनके समाधान के लिए प्रदर्शन का इंतजार क्यों किया गया। शिक्षा संस्थानों में बिजली, पानी, शौचालय और फर्नीचर जैसी बुनियादी सुविधाएं पहले से उपलब्ध होना प्रशासन और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बच्चों की जायज मांगों को पूरा कराने के लिए भी धरना-प्रदर्शन का सहारा लेना पड़ेगा।
✍️नागेंद्र सिंह अध्यक्ष फतेहपुर प्रेस क्लब
