सवाल तो पूछेंगे❓
👉तहसील सुधारो, तभी खत्म होंगी जन समस्याएं!!
👉समयबद्ध निस्तारण और जवाबदेही से ही मिलेगी आम जनता को राहत!!
फतेहपुर। जन समस्याएं किसी एक व्यक्ति की परेशानी नहीं हैं, बल्कि यह आम जनता की वह पीड़ा है जो आए दिन तहसील मुख्यालयों के चक्कर लगाते हुए सामने आती है। जाति ,आय, निवास , हैसियत प्रमाण पत्र अथवा अनापत्ति प्रमाण पत्र जैसे जरूरी कार्यों के लिए लोगों को जिस प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, वह किसी से छिपा नहीं है। यही कारण है कि संपूर्ण समाधान दिवसों में शिकायतें सुनने और निर्देश जारी होने के बावजूद समस्याएं समाप्त होने का नाम नहीं लेतीं और समय-समय पर ऐसे मामले सुर्खियां बन जाते हैं।
जनता का मानना है कि अधिकांश जन समस्याओं का जन्म भले ही गांवों और कस्बों में होता हो, लेकिन उन्हें बढ़ाने का काम कई बार तहसील स्तर पर होने वाली लापरवाही करती है। समय पर सुनवाई और निष्पक्ष कार्रवाई न होने के कारण छोटे-छोटे विवाद धीरे-धीरे बड़े झगड़ों का रूप ले लेते हैं। यदि संबंधित अधिकारी समय रहते इन मामलों का निस्तारण कर दें तो न केवल विवादों को बढ़ने से रोका जा सकता है, बल्कि लोगों को न्याय के लिए भटकने से भी बचाया जा सकता है।
जिले के वरिष्ठ अधिकारी लगातार जन समस्याओं को लेकर चिंता जताते रहे हैं। संपूर्ण समाधान दिवस हो या जिला मुख्यालय में आयोजित जनसुनवाई, हर मंच पर अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए जाते हैं। कई बार लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों को फटकार भी लगती है, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं देता। ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ कारक ऐसे हैं जो जिम्मेदार अधिकारियों को अपने दायित्वों के प्रति गंभीर होने से रोक रहे हैं।
स्थिति यह है कि जब लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं होता तो कोई समाधान दिवस में हंगामा करता है, कोई जिला मुख्यालय पहुंचकर आत्महत्या की चेतावनी देता है, तो कभी पूरा परिवार न्याय की गुहार लगाने के लिए अधिकारियों के दरवाजे पर पहुंच जाता है। ऐसे मामलों में अक्सर तहसील स्तर पर उदासीनता और लापरवाही के आरोप लगते हैं, जो प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं।
यह चर्चा किसी एक व्यक्ति या किसी एक मामले की नहीं है। यह उन हजारों आम नागरिकों की बात है जो रोजमर्रा के कामों और जमीन संबंधी मामलों के लिए तहसील कार्यालयों पर निर्भर हैं। सरकार ने अधिकांश सेवाओं के लिए समय सीमा निर्धारित कर रखी है, फिर भी लोगों को बार-बार चक्कर लगाने और मानसिक परेशानियों से गुजरने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ता है? यह सवाल तहसील मुख्यालयों में बैठने वाले जिम्मेदार अधिकारियों से पूछा जाना चाहिए।
यदि वास्तव में जन समस्याओं को कम करना है तो केवल शिकायतें सुनना पर्याप्त नहीं होगा। आवश्यकता है कि तहसील स्तर पर जवाबदेही तय हो, समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए और जनता को अनावश्यक दौड़-भाग से राहत मिले। जब तहसील व्यवस्था मजबूत और संवेदनशील होगी, तभी जन समस्याओं का स्थायी समाधान संभव हो सकेगा। आखिर प्रशासन की सफलता का पैमाना भी यही है कि आम नागरिक को अपने अधिकारों और आवश्यक कार्यों के लिए भटकना न पड़े।
✍️ नागेंद्र सिंह अध्यक्ष फतेहपुर प्रेस क्लब
