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❓सवाल तो पूछेंगे…!
फतेहपुर के अटल बिहारी चौराहे पर ऐसा दृश्य दिखा कि देखने वाले भी मुस्कुरा उठे —
एक तरफ कार्यकर्ता पूरे जोश में “पुतला जलाओ” मोड में थे,
तो दूसरी तरफ पुलिस “पुतला बचाओ अभियान” चलाती दिखी।
हालात ऐसे बने कि राहुल गांधी और अजय राय का पुतला पूरा जलने से पहले ही पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच रस्साकशी का शिकार हो गया।
आखिरकार पुतला भी सोच में पड़ गया होगा कि
“मुझे जलाया जा रहा है या बचाया जा रहा है?”
काफी देर चली छीना-झपटी के बाद पुतला आधा-अधूरा ही जल सका।
मौके पर मौजूद लोग यही कहते नजर आए —
“इतनी सुरक्षा अगर आम जनता को मिल जाए, तो आधी समस्याएं खत्म हो जाएं!”
अब सवाल तो पूछेंगे ही…
जब सत्ता पक्ष पुतला जलाए तो पुलिस क्यों नाराज दिखी?
और अगर पुतला दहन गलत है, तो ये नियम सब पर बराबर लागू होगा या सिर्फ मौके देखकर?
✍️ नागेंद्र सिंह
अध्यक्ष, फतेहपुर प्रेस क्लब
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- कल तक विपक्ष से पुतले बचाने वाली पुलिस, आज सत्ता पक्ष के कार्यकर्ताओं से ही पुतला छीनती नजर आई।
कल तक विपक्ष से पुतले बचाने वाली पुलिस, आज सत्ता पक्ष के कार्यकर्ताओं से ही पुतला छीनती नजर आई।
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