सवाल तो पूछेंगे❓
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फतेहपुर। लाख प्रयासों के बावजूद जनपद में ओवरलोड मौरंग वाहनों पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है। सड़कों पर बेधड़क दौड़ रहे ये वाहन न केवल सड़कें तोड़ रहे हैं, बल्कि आए दिन हादसों का कारण बनकर लोगों की जान भी ले रहे हैं। इसके बावजूद खनन ,परिवहन विभाग और क्षेत्रीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि जनपद में यमुना नदी से बड़े पैमाने पर मौरंग खनन का कार्य चल रहा है। अवैध खनन के चलते जहां सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं ओवरलोड वाहन सड़क व्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं। खासकर बिंदकी व खागा कस्बे से होकर गुजरने वाले भारी वाहन दिन-रात बिना किसी रोकटोक के फर्राटा भर रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो खनन विभाग, उप संभागीय परिवहन विभाग और क्षेत्रीय पुलिस की खनन माफियाओं से सांठगांठ के चलते इन वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। चर्चा यह भी है कि ओवरलोड वाहनों की “एंट्री” पहले से तय रहती है, जिसके चलते वाहन चालक बेखौफ होकर जनपद की सड़कों पर दौड़ते हैं। बताया जाता है कि ऐसे वाहनों के नंबर संबंधित ठेकेदारों के रजिस्टरों में दर्ज रहते हैं।
गौरतलब है कि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त बैठक कर मौरंग खनन कारोबारियों को शासन की गाइडलाइन का पालन कराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा बार-बार निर्देश दिए जा रहे हैं, तो फिर अवैध खनन और ओवरलोड वाहनों पर पूरी तरह रोक क्यों नहीं लग पा रही है।
लोगों का यह भी कहना है कि एसटीएफ की कार्रवाई के बाद कुछ समय के लिए खनन विभाग सक्रिय जरूर हुआ, लेकिन बाद में फिर स्थिति पुराने ढर्रे पर लौट आई। ऐसे में अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जिम्मेदार विभाग कब तक आंख, कान और मुंह बंद कर गांधी जी के तीन बंदरों की भूमिका निभाते रहेंगे।
✍️ नागेंद्र सिंह अध्यक्ष फतेहपुर प्रेस क्लब
