हनुमान मंदिर में 426वीं साप्ताहिक सरस काव्य गोष्ठी

फतेहपुर(वी.टी)। मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 426 वीं  साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन आचार्य विष्णु शुक्ल एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ।काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए  केपी सिंह कछवाह ने वाणी वंदना मां शारदे,अभिव्यक्ति दे ,नव साधना की भक्ति दे ‌। गीत गाएं वंदना के, सर्जना की शक्ति दे। आगे पढा कि सनातनी सद्भाव का घुले फिजा में रंग भेदभाव सब भूलकर  होली खेलें संग। डा. सत्य नारायण मिश्र ने पढ़ा कि कर्म से भोग,भोग से कर्म,यही है नियति नटी का खेल। इसी में सबके सब अनुरक्त, इसी से जीव- जगत का मेल।आचार्य विष्णु शुक्ल ने पढा कि आज बुरा नहीं मानेंगे कान्ह, करौ चाहै जैसन जौन ठिठोली। चोली रंगौ, चहै चोला रंगौ, चाहे चूनर ,राजे जी आज है होली।प्रदीप कुमार गौड़ ने पढ़ा कि बुलेट बनी बौछार रंग की, लाइसेंसी गन पिचकारी।बुरा न मानो होली कह, गोरी की चूनर रंग डाली।सुश्री वीणा ने पढ़ा कि  जब उड़ना चाहा ,लगे लोग कतरने पंख। मिथ्या नारी जागरण का गुंजित जयशंख।डॉ. शिव सागर साहू ने पढा कि लगन लगी श्री कृष्ण में ,मन में भरी उमंग। राधा होली खेलतीं, पिचकारी भर रंग। राम अवतार गुप्ता ने पढ़ा होली में जल जाएं सब, काम, क्रोध,मद लोभ।बिछड़े जन भी  जाएं मिल रहे न मन मे क्षोभ। उमाकांत मिश्र ने पढ़ा कि सियासत में  लोग इस तरह षड़यंत्री बने,आता नहीं कुछ भी, मगर धनवंतरी बने। वह जीत कर चुनाव विधायक ही बन सके, एक हार कर चुनाव मुख्यमंत्री बने।अनिल कुमार मिश्र ने पढ़ा कि ग्वाल बाल संग डोलत ब्रज में, करत फिरैं घनश्याम ठिठोली। ढूंढत हैं वृषभानुजा को, ब्रजनाथ जू  खेलिबे संग में होली। शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने पढ़ा कि होली ऐसी खेलिये,चढ़े प्रेम का रंग।सब में हर्षोल्लास हो,पर्व न हो बदरंग। कार्यक्रम के अंत में  पुजारी जी ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया।

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