फतेहपुरजनपदके‘देवरी बुजुर्ग’ गांव में ‘₹15लाख’ के ‘घोटाले’ पर ‘जिलाधिकारी’ की ‘प्रधान’ को ‘नोटिस’
👉शिकायत के बाद तीन सदस्यीय कमेटी ने की जांच!
👉इंटरलॉकिंग,हैंडपंप,स्वच्छता कायाकल्प,पंचायत भवन आदि के कामों में की गई गड़बड़ी!
👉प्रधान,सचिव एवं उनके चहेते ने अपने ही खातों में ले लिया पैसा!
👉वित्तीय,प्रशासनिक अधिकार सीज कर तीन सदस्यीय कमेटी गठित होने की उम्मीद!
👉अधिकारियों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार एवं मनमानी करने के आदी हो गए हैं प्रधान,सचिव!
👉हिस्सेदारी ने विकास खंड से लेकर मुख्यालय तक के अधिकारियों को बना रखा है पंगु!
👉जहां हो रही जांच उजागर हो रहा भ्रष्टाचार,बांकी के घूम रहे चंगे!
👉बोगस टेंडर प्रक्रिया,ओडीएफ,मनरेगा के कामों में मची है लूट!
✍🏿 ग्राम पंचायतों के भ्रष्टाचार किसी से छिपे नहीं है इनमें हिस्सेदारी के चलते विभागीय अफसर ही पर्दा डाले रहते हैं जिससे हर साल आने वाले करोड़ों रुपए पानी की तरह बह जाने के बावजूद गांवों की तस्वीर बदली नजर नहीं आती। जिन ग्राम पंचायतों में शिकवा शिकायतें हो जांच हुई वहां भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर उजागर होकर सामने आए हैं।ऐसा ही एक मामला अमौली विकास खंड के देवरी बुजुर्ग गांव का है जहां शिकायत के बाद गठित हुई तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ₹15,01239 रुपए को ग्राम प्रधान व सचिव की मिली भगत से गबन कर लिया गया। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अब जिलाधिकारी रविंद्र सिंह ने नोटिस जारी कर कहा गया है कि क्यों ना प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज कर ग्राम पंचायत के कामकाज को तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया जाए।
जांच के दायरे में आने वाली ग्राम पंचायतें भ्रष्टाचार की चपेट में आ ही जाती हैं।फतेहपुर जिले के 13 विकास खंडों की 816 ग्राम पंचायतों में प्रधान,सचिव एवं खंड विकास अधिकारियों की मनमानी चल रही है। गांवों में पानी की तरह पैसा तो बहाया जा रहा है लेकिन गांवों की उजली तस्वीर नजर नहीं आती।रिपेयर वर्क,हैंडपंप री-बोर,स्वच्छता,मनरेगा के कामों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने वाली ‘त्रिमूर्ति’ की मनमानी एवं भ्रष्टाचार पर तब तक पर्दा पड़ा रहता है जब तक किसी की शिकवा शिकायत उच्चाधिकारियों तक नहीं पहुंची। शिकायतों में जांच से गांव के विकास की पोल खुल कर सामने आ जाती है।ऐसा ही मामला देवरी बुजुर्ग ग्राम पंचायत का आया जहां राजेश कुमार शुक्ला एवं अवधेश कुमार की शिकायत पर जिलाधिकारी ने गत 13अगस्त को भूमि संरक्षण अधिकारी राष्ट्रीय जलागम,जिला लेखा परीक्षा अधिकारी एवं अधिशासी अभियंता निचली गंगा नहर की कमेटी बनाकर भ्रष्टाचार के बिंदुओं की जांच कराई तो मामला खुलकर सामने आ गया।
ग्राम प्रधान एवं सचिव के द्वारा सांठगांठ कर इंटरलॉकिंग,नाली निर्माण,पेयजल,साफ सफाई,कायाकल्प,पंचायत भवन के कामों में घोटाला सहित प्रोपराइटर सचिन की फर्म में भुगतान एवं उसी को कुशल मजदूर दर्शाने का मामला सामने आया है। गांव का ₹15 लाख रुपए का घोटाला सामने आया है।गांवों में घोटाले की फेहरिस्त ऐसी है कि मनरेगा,ओडीएफ,15वें वित्त,राज्य वित्त के कामों में बड़ी घपलेबाजी जारी है।बोगस टेंडरिंग ने भ्रष्टाचारियों के हौसलों को और बढ़ा कर रखा है। जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधान एवं सचिव को नोटिस जारी कर जिला पंचायतराज अधिकारी के माध्यम से जवाब तलब किया है। संतोषजनक स्पष्टीकरण ना होने पर ग्राम पंचायत में तीन सदस्यीय कमेटी के गठन,वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों को सीज करने का अल्टीमेटम दिया गया है। जिले में सरकंडी,चक इटौली,दुगरेई,धनसिंहपुर,नहरखोर,देवगांव,दूलापुर,कठवारा सहित अनगिनत ऐसी ग्राम पंचायतें हैं जहां शिकायतों पर भ्रष्टाचार की जांच हुई और भ्रष्टाचार उजागर हुआ।इसी कड़ी में देवरी बुजुर्ग भी शामिल हो गई है लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत के चलते जनपद में सरकारी खजाने की लूट मचाने वाले भ्रष्टाचारी अपने मंसूबों में बराबर कामयाब हो रहे हैं।
रिपोर्ट- हरीश शुक्ला
