2027 का चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है वैसे-वैसे भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव में पास होने के लिए हर तरह की चाल चलने को तैयार है। 10 मई को जिन विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई उसमें जातीय समीकरण का पूरा ध्यान रखा गया है। इसी समीकरण के जरिए अगले वर्ष यानी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के इम्तिहान में भाजपा पास होने के लिए हर प्रश्नों के उत्तर को तलाश रही है।
2022 के विधानसभा चुनाव में फतेहपुर में भाजपा को छह विधानसभा सीटों में से दो सीटों का नुकसान झेलना पड़ा था जबकि 2017 में सभी 6 सीटों पर कमल खिलाने में भाजपा कामयाब हुई थी। 2022 में हुए नुकसान की भरपाई के लिए भाजपा ने दलित कार्ड खेला है। चार बार विधानसभा का चुनाव जीतकर कृष्णा पासवान ने प्रदेश नेतृत्व के सामने जो छवि बनाई उसी का परिणाम है कि उन्हें मंत्री बनाया गया है। अब कृष्णा पासवान की जिम्मेदारी है कि 2022 के चुनाव में भाजपा ने जो प्रतिष्ठाखोई है उसे वापस दिलवाए।
कृष्णा पासवान को ना केवल अपने जातीय मतदाताओं को साधना है बल्कि जनपद में भाजपा की गुटबाजी पर भी विराम लगाना है जो श्रीमती पासवान के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है। इसी गुटबाजी के चलते भाजपा को न केवल लोकसभा सीट गवानी पड़ी थी बल्कि इसके पहले हुए विधानसभा चुनाव में दो सीटों का नुकसान भी उठाना पड़ा था। भाजपा की गुट बाजी अभी भी पहले जैसी ही है जो एक किलेबंदी का रूप ले चुकी है। गुटबाजी ऐसी है कि एक दूसरे को देखना भी पसंद नहीं करते यहां तक कई मौके ऐसे आए जिसमें एक दूसरे पर बयान बाजी कर आपसी झगड़े को सार्वजनिक कर दिया।
