फतेहपुर (वंदना टाईम्स)। मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले साप्ताहिक सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन के पी सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं डॉ. शिवसागर साहू के संचालन में हुआ । शुभारंभ करते हुए केपी सिंह कछवाह ने वाणी वंदना सरस्वती मां, आइए, हम सब करें पुकार। कविता का रस – छंद से, हो अनुपम श्रंगार।
पढा कि शिल्पी नूतन राष्ट्र के, थे सरदार पटेल। रियासतों का देश में , करवाया था मेल। डा. सत्य नारायण मिश्र ने पढ़ा कि इस मृत्यु लोक का नियम यही, परिवर्तन ही परिवर्तन है। यदि परिवर्तन से विमुख मनुज, जड़वत ही उसका जीवन है। राम अवतार गुप्ता ने पढ़ा कि लौहपुरुष सरदार को, पूजे सब संसार। सत्कर्मों की ही सदा, होती जय – जयकार। प्रदीप कुमार गौड़ ने पढ़ा कि रामचरितमानस सबको , जीवन का मर्म बताता है। क्या, किसका दायित्व, धर्म क्या, जन-जन को सिखलाता है।संचालन करते हुए डा. शिव सागर साहू ने पढ़ा कि अधिक ताप सहता हुआ, बहुत दिनों पश्चात।हो परिवर्तित कोयला, हीरे में, विख्यात। अनिल कुमार तिवारी ‘निर्झर’ ने पढ़ा- चीनी की कीमत बढ़ी, महंगी हो गई दाल। तेल गगनचुंबी हुआ, जनगण है बेहाल। उमाकांत मिश्र ने पढ़ा – बोझ मिथ्या भरम, तोड़तीं बेटियां। दो घरों को सदा, जोड़तीं बेटियां। आयोजक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने पढ़ा कि मिट्टी का दीप फूटना है, फूटेगा ही , फिर भी हमको इतना कर्तव्य निभाना है। मिट्टी के मिट्टी में मिलने से पहले ही, जग को उजियाले से जगमग कर जाना है।
