सड़कों पर बेखौफ दौड़ रहीं काले शीशों वाली गाड़ियां, हूटर भी लगे—नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों पर कार्रवाई कब
फतेहपुर (वंदना टाईम्स)। शहर की सड़कों पर यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। वाहनों के शीशों पर काली फिल्म चढ़ाकर और कई गाड़ियों में हूटर लगाकर चालक बेखौफ फर्राटा भर रहे हैं, जबकि यातायात पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। हालात देखकर लगता है कि नियम किताबों में हैं और सड़क पर मनमानी का राज!
राजधानी दिल्ली में निर्भया कांड के बाद वाहनों के शीशों पर काली फिल्म को लेकर नियम सख्त किए गए थे। समय-समय पर अभियान चलाकर ऐसे वाहनों पर कार्रवाई भी होती रही है। मगर फतेहपुर शहर में स्थिति इसके उलट नजर आ रही है। शहर के प्रमुख मार्गों पर काले शीशों वाली गाड़ियां खुलेआम दौड़ती दिखाई देती हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन वाहनों पर यातायात पुलिस की नजर नहीं पड़ती, या नजर पड़ने के बावजूद कार्रवाई से परहेज किया जा रहा है? कभी-कभार अभियान चलाकर कार्रवाई की खबर जरूर सामने आती है, लेकिन सड़कों पर मौजूद काले शीशों वाली गाड़ियों की संख्या देखकर कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। छोटे वाहन तुरंत पकड़ में, बड़ी गाड़ियों पर नजर क्यों नहीं? आम वाहन चालक यातायात नियमों की मामूली चूक पर कार्रवाई का सामना करता है। वहीं दूसरी ओर काले शीशों और हूटर से लैस चमचमाती गाड़ियां सड़कों पर बेखौफ दौड़ती नजर आती हैं। यही दोहरा नजारा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। शहरवासियों का कहना है कि यदि यातायात नियम सभी के लिए समान हैं तो कार्रवाई भी बिना भेदभाव के होनी चाहिए। अभियान का असर तभी दिखाई देगा, जब नियम तोड़ने वाले हर वाहन पर समान सख्ती बरती जाए। जाम के बीच नियमों की भी अनदेखी फतेहपुर शहर पहले से ही जाम और अव्यवस्थित यातायात की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में नियमों की अनदेखी करने वाले वाहनों ने यातायात व्यवस्था के सामने एक और चुनौती खड़ी कर दी है। लोगों का सवाल है कि जब सड़कों पर यातायात पुलिस की सक्रिय मौजूदगी रहती है तो फिर काले शीशों और नियम विरुद्ध हूटर लगे वाहन आखिर कार्रवाई से कैसे बच निकलते हैं निगाहें यातायात पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या काले शीशों और नियम विरुद्ध हूटरों के खिलाफ वास्तविक अभियान चलेगा, या फिर कार्रवाई का पहिया सिर्फ कागजों पर ही घूमता रहेगा?
