शास्त्री परिवार की तीसरी पीढ़ी ने संभाली राजनीतिक पिच, भाजपा टिकट की दावेदारी को लेकर चर्चाएं तेज
फतेहपुर (वंदना टाईम्स)। फतेहपुर की सियासत में एक बार फिर शास्त्री परिवार की राजनीतिक विरासत चर्चा में है। कांग्रेस से राजनीतिक सफर शुरू करने के बाद भाजपा में सक्रिय हुए विभाकर शास्त्री के पुत्र विराज शास्त्री की सियासी सक्रियता को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी और राजनीतिक संपर्कों के बीच उनके भाजपा से टिकट की दावेदारी को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं।
शास्त्री परिवार का फतेहपुर की राजनीति से पुराना और गहरा नाता रहा है। परिवार की पहली पीढ़ी में हरिकृष्ण शास्त्री ने कांग्रेस के टिकट पर 1980 और 1984 के लोकसभा चुनाव में फतेहपुर का प्रतिनिधित्व किया था। 1980 में उन्होंने 1,27,851 मत हासिल कर जीत दर्ज की थी, जबकि 1984 में उन्हें 2,08,578 मत मिले और उन्होंने दोबारा संसद में फतेहपुर का प्रतिनिधित्व किया।
हालांकि 1989 के लोकसभा चुनाव में राजनीतिक समीकरण बदले और हरिकृष्ण शास्त्री को जनता दल के विश्वनाथ प्रताप सिंह के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
इसके बाद परिवार की दूसरी पीढ़ी के रूप में विभाकर शास्त्री ने राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर 1998 और 1999 में लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों चुनावों में जीत हासिल नहीं कर सके। इसके बाद 2007 में फतेहपुर सदर विधानसभा सीट से भी कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन विधानसभा चुनाव में भी सफलता नहीं मिली।
अब शास्त्री परिवार की राजनीतिक विरासत तीसरी पीढ़ी तक पहुंचती दिखाई दे रही है। विराज शास्त्री की राजनीतिक गतिविधियों ने फतेहपुर के सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दिया है। सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रियता के साथ राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र के लोगों से उनकी मुलाकातों को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि भाजपा की ओर से टिकट को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
विराज शास्त्री की सक्रियता के साथ ही फतेहपुर की राजनीति में कई सवाल भी उठ रहे हैं। क्या परिवार की पुरानी राजनीतिक पहचान तीसरी पीढ़ी के लिए आधार बनेगी? क्या विरासत की सियासत को नई पीढ़ी की सक्रियता और संगठनात्मक स्वीकार्यता में बदला जा सकेगा? वहीं भाजपा के संगठन में लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ताओं के बीच नए चेहरे की दावेदारी किस तरह आकार लेगी, यह भी आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
फिलहाल विराज शास्त्री की संभावित राजनीतिक एंट्री ने फतेहपुर की सियासत में चर्चाओं को जरूर गर्म कर दिया है। अब निगाहें भाजपा के अगले राजनीतिक फैसले और टिकट की घोषणा पर टिकी हैं। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि शास्त्री परिवार की तीसरी पीढ़ी औपचारिक रूप से चुनावी मैदान में उतरती है या यह चर्चा फिलहाल सियासी गलियारों तक ही सीमित रहती है।
