मजदूरी भुगतान में देरी रोकने, मजदूरी दर बढ़ाने और जॉब कार्ड अपडेट कराने की उठाई मांग
फतेहपुर(वंदना टाईम्स)। मनरेगा मजदूर संघ, इकाई उत्तर प्रदेश के जिला अध्यक्ष लाल बहादुर निषाद ने मनरेगा मजदूरों की समस्याओं और चार प्रमुख मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन के माध्यम से मजदूरों की समस्याओं का तत्काल समाधान किए जाने की मांग की गई है। साथ ही मांगें पूरी न होने पर लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
ज्ञापन में कहा गया कि मनरेगा ग्रामीण गरीब परिवारों के लिए रोजगार और आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है, लेकिन मजदूरों को समय से काम, मजदूरी भुगतान, रोजगार की निरंतरता तथा योजना से जुड़े अधिकारों का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई स्थानों पर काम के लिए आवेदन करने, मास्टर रोल में नाम दर्ज कराने, मजदूरी भुगतान और बेरोजगारी भत्ता प्राप्त करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
संघ ने पहली मांग के रूप में मनरेगा मजदूरों की मजदूरी का भुगतान निर्धारित समय-सीमा के भीतर कराने तथा लंबित मजदूरी का तत्काल भुगतान किए जाने की मांग की। भुगतान में अनावश्यक देरी होने पर नियमानुसार मुआवजा दिलाने और काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता दिए जाने की भी मांग की गई। मनरेगा एवं वीबीजीआरएएमजी में भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगाने के लिए मनरेगा मजदूर संघ को निगरानी एवं निरीक्षण का अधिकार दिए जाने की मांग की गई। मजदूरी दर में महंगाई और वर्तमान जीवन-यापन की लागत के अनुरूप वृद्धि किए जाने की बात कही गई। साथ ही मजदूरों को सम्मानजनक आय उपलब्ध कराने के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने तथा नदियों की खुदाई एवं जंगलों के निर्माण और संरक्षण जैसे कार्यों में मनरेगा मजदूर संघ को भी क्रियान्वयन निकाय बनाए जाने की मांग रखी साथ ही मनरेगा में कार्यरत श्रमिकों के पास अपने कार्य का कोई साक्ष्य नहीं रहता। ऐसे में जॉब कार्डों का नवीनीकरण कराकर प्रतिदिन मजदूरी और कार्य का अंकन किए जाने के स्पष्ट निर्देश दिए जाएं तथा इसकी निगरानी हो। संघ ने डिजिटल हाजिरी व्यवस्था को बंद करने की भी मांग की।
संघ ने मुख्यमंत्री से चारों मांगों पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई करते हुए संबंधित विभागों को स्पष्ट शासनादेश जारी करने का अनुरोध किया है। मजदूर संघ जिला श्री निषाद ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई और संतोषजनक लिखित जवाब नहीं मिला तो मनरेगा मजदूर संघ उत्तर प्रदेश के मजदूरों और कर्मचारियों के साथ लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से धरना-प्रदर्शन व प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम आयोजित करने के लिए बाध्य होगा।
