अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस व चल रहे युद्ध पर कवियों ने सुनाई एक से बढ़कर एक रचनाएं

फतेहपुर(वी.टी। मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 427 वीं  साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन आचार्य विष्णु शुक्ल की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ। काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए  के पी सिंह कछवाह ने वाणी वंदना में पढ़ा कि सरस्वती मां, आइए ,करें तुम्हारा ध्यान। भाषा -अक्षर – ज्ञान दे ,दें हमको पहचान। पुनःपढ़ा कि नारी नर की शक्ति है, हो उस पर अभिमान।अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस , करवाता यह भान। डा. सत्य नारायण मिश्र ने पढ़ा कि नारी है अधिकार मांगती, नहीं चाहती कृपा मात्र अब।क्षतन मन धन अरु लगन से ,सिद्ध कर रही योग्य पात्र जब।आचार्य विष्णु शुक्ल ने पढ़ा कि वन साथ पिया जो न होतीं सिया, दल रावण नाश करावत को।यम पाछे सावित्री जो ना पड़तीं सत्यवान के प्राण बचावत को।प्रदीप कुमार गौड़ ने पढ़ा कि इस धरती से आसमान तक ,नारी का उन्नत स्थान। जल थल नभ के लक्ष्य भेद कर, बना रहीं अपनी पहचान।अनिल कुमार मिश्र ने पढ़ा कि छोड़ना ही था नशेमन तो बसाया किसलिए,तुमने मुझको दूर से साहिल दिखाया किसलिए।अश्क बनकर आंख से ढल जाए जो जाने वफा,कोई ऐसा ख्वाब पलकों पर सजाया किसलिए। डा. शिवसागर साहू ने पढ़ा मां बहना, बेटी तथा भार्या का धर रूप,नारी ही नरसृष्टि को करती अमल- अनूप। आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पढ़ा कि नौ दुर्गा, दस देवियां,नारी में साकार,नारी से ही सृष्टि का, है समस्त श्रृंगार। अमेरिका इजरायल और ईरान युद्ध पर पढ़ा कि अमेरिका ईरान का, युद्ध पकड़ता जोर,बढ़ा जा रहा तीसरे विश्वयुद्ध की ओर।

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