गन्ने का मूल्य ₹500 प्रति क्विंटल करने एवं आलू किसानों की समस्याओं को लेकर भाकियू ने किया प्रदर्शन 

बेमौसम बारिश से फसल नुकसान का मुआवजा और आलू का सस्ता बीज उपलब्ध कराने की उठाई आवाज

                         

फतेहपुर (वंदना टाईम्स)। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने किसानों की समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया।जिलाध्यक्ष राजकुमार सिंह की अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने केंद्र व प्रदेश सरकार को संबोधित अपर जिलाधिकारी को छह सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य बढ़ाकर 500 रुपये प्रति क्विंटल करने एवं आलू किसानों को सस्ता बीज उपलब्ध कराने सहित विभिन्न मांगों को उठाते हुए  पूरा किए जाने की मांग की।     बताया कि प्रदेश में गन्ना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। करीब 48 लाख किसान परिवार प्रत्यक्ष रूप से गन्ने की खेती से जुड़े हैं। कृषि मजदूरों, परिवहन कारोबारियों, चीनी मिलों और गुड़ उद्योग से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका भी इस पर निर्भर है। पिछले वर्षों में डीजल, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ी है लेकिन गन्ने के मूल्य में उस अनुपात में वृद्धि नहीं हुई है। ऐसे में आगामी पेराई सत्र के लिए गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करने और किसानों को समय से भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई। बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से धान, उड़द, मूंग सहित अन्य फसलों को हुए नुकसान का गांववार सर्वे कराने की मांग भी उठाई। संगठन ने कहा कि प्रभावित किसानों को वास्तविक क्षति के आंकलन के आधार पर शीघ्र मुआवजा और फसल बीमा की धनराशि दिलाई जाए। कटाई के बाद खेतों या खलिहानों में रखी उपज को हुए नुकसान को भी नियमानुसार राहत में शामिल किया जाए। आलू किसानों की समस्याओं को उठाते हुए कोल्ड स्टोर के किराये में सहायता का लाभ शासनादेश जारी होने से पहले आलू निकाल चुके किसानों को भी देने की मांग की गई। उद्यान विभाग की ओर से 3600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से दिए जा रहे आलू के बीज की कीमत घटाकर अधिकतम 1500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की गई। संगठन का कहना है कि किसानों को उन्नत किस्म का बीज सस्ती दर पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने ठेके और बटाई पर खेती करने वाले किसानों को भी मुआवजा एवं राहत योजनाओं के दायरे में शामिल करने पर जोर दिया। कहा गया कि ऐसे किसान खेती की लागत स्वयं वहन करते हैं लेकिन भूमि अभिलेखों में नाम दर्ज नहीं होने के कारण कई बार सरकारी सहायता से वंचित रह जाते हैं। ग्राम पंचायत, लेखपाल और कृषि विभाग के संयुक्त सत्यापन से वास्तविक खेती करने वाले किसानों की पहचान कर उन्हें राहत देने की व्यवस्था बनाई जाए।धान, गेहूं, गन्ना और दलहन समेत विभिन्न फसलों में जरूरत के अनुसार यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की गई। पदाधिकारियों ने कहा कि बढ़ती कृषि लागत प्राकृतिक आपदाओं और बाजार की अनिश्चितताओं के बीच किसानों की आय एवं उत्पादन क्षमता सुरक्षित रखना जरूरी है। इसके लिए सरकार को किसानों की समस्याओं पर प्रभावी निर्णय लेकर राहत पहुंचानी चाहिए। इस मौके पर प्रदीप सिंह चौहान,अंकित सिंह, महेंद्र सिंह भदौरिया, छोटे सिंह, सोनू सिंह, उमेश सिंह, अजय सिंह, विकास सिंह, अजय प्रजापति, शिव बदन सिंह, दिनेश सिंह, शिवधेस मौर्य सहित बड़ी संख्या में किसान एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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